
आगरा के अजय कुमार ने हाथ ना होने को कभी अपनी कमजोरी नहीं समझा। उन्होंने पैरों से एग्जाम लिखकर दसवीं में 71.8% नंबर हासिल किए हैं। अजय जन्म से ही ऐसे थे। उनके हाथ नहीं थे लेकिन उनकी यह कमी कभी उन्हें आगे बढ़ने से नहीं रोक पाई। वह अपने साथियों की तरह हाथ से नहीं लिख सकते थे लेकिन मेहनत की बल पर उन्होंने पैर से लिखने पर पारंगत हासिल कर ली। खास बात यह भी है कि उन्होंने पेपर के दौरान अलग से कोई ज्यादा समय भी नहीं मांगा, 3 घंटे में पेपर पूरा कर साथी छात्रों के साथ ही उन्होंने भी अपनी कॉपी जमा की।
16 साल के अजय उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिला भोगांव गांव के रहने वाले हैं। वह अपनी पैर की अंगुलियों में पेंसिल को फंसाकर एक आम आदमी की तरह ही लिखते हैं। वास्तव में वह अपने रोजाना के कामों को अंजाम देने के लिए हाथ की जगह पैर को ही इस्तेमाल करते हैं। उनकी अपंगता इंजिनियर बनने के उनके रास्ते में अब तक बाधा नहीं बन पाई है।
अजय कुमार ने एसआर इंटर कॉलेज से परीक्षा दी और 600 में से 431 अंक हासिल किए हैं। वह अपनी सफलता पर खुश तो हैं लेकिन अगली परीक्षा में 80 फीसदी से ज्यादा अंक लाने का संकल्प लिया है।
वह बताते हैं कि कुछ साथी पैर से लिखते देख हैरान होते थे लेकिन ज्यादातर साथियों ने उनका हौसला बढ़ाया और प्रसंसा की। कुछ ही छात्र ऐसे थे जो उन पर हंसते थे और उनकी पीठ पीछे मजाक उड़ाया करते थे। लेकिन, इन चीजों से वह कभी हतोत्साहित नहीं हुए।
उन्होंने बताया, 'मैं जानता हूं कि मैं कौन हूं और मेरे अंदर क्या क्षतमा है। मैं अपनी क्षमताओं का भरपूर इस्तेमाल करूंगा और कभी हिम्मत नहीं हारूंगा। मैं पैर से फोन पकड़कर बात करता हूं। मैं अपने दांतों को धोने और खाने तक के लिए पैर का इस्तेमाल करता हूं। अगर मेरे पास हाथ होता तो मैं परीक्षा में और बेहतर करता लेकिन फिर भी कोई बात नहीं मेरे पैर ही अब मेरे हाथ हैं।'
अपने बेटे के प्रदर्शन पर काफी गर्व महसूस कर रहे अजय के पिता, दयाराम, जो एक छोटे किसान हैं और मां मीरा देवी ने बताया, 'जब उसका जन्म हुआ था तो हम इस बात को लेकर चिंतित थे कि वह हाथों के बगैर सामान्य जीवन कैसे जिएगा लेकिन उन्होंने साबित दिया की अपगंता उनको अपने लक्ष्य हासिल करने से नहीं रोक सकती।'
Source :liveindia
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