
12 साल की उम्र बच्चों के खेलने-कूदने की उम्र होती है। बच्चे अपने पिता की उंगलियों के सहारे अपने जीवन के रास्ते पर चलना सिख रहे होते हैं। इसी उम्र में एक 12 साल के बालक के साथ दुखद घटना घटी और उसके सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ गया। जब उसे अपनी पिता के मौत की सच्चाई का पता चला तो उसने प्रण लिया कि वो अब कुछ ऐसा करेगा जिससे उसके सामने दोबारा किसी के सिर से पिता का साया न उठ सके।
यह कहानी है लखनऊ में रहने वाले रोहित पाण्डेय की, जिन्हें 12 साल की उम्र में ही अपने पिता के पार्थिव शरीर को मुखाग्नि देना पड़ा। रोहित के सारे सपने ऐसे धाराशायी हो गए जैसे कोई सुनामी आई हो सब कुछ बहा कर ले गई हो।
19 जून यानी फादर्स डे के अवसर पर रोहित ने न्यूज 24 से खास बातचीत की...
रोहित ने बताया कि नवम्बर, 2002 में एक सड़क हादसे में उनके पिता का निधन हो गया। 2009 में रोहित ने जब घटना स्थल पर जाकर पता किया तो पाया कि एक्सिडेंट के बाद उनके पिता 45 मिनट तक सड़क पर ही पड़े रहे लेकिन किसी ने भी उन्हें अस्पताल तक नहीं पहुंचाया। समय रहते इलाज न मिल पाने के कारण उनके पिता ने दम तोड़ दिया।
इस घटना ने रोहित को अंदर तक झकझोर दिया था। इसके बाद रोहित ने संकल्प लिया कि अब से वो सड़क हादसे में घायल हुए लोगों के जीवन को बचाने का हरसंभव प्रयास करेगा। तब से आज तक रोहित 35 से ज्यादा लोगों को सड़क से अस्पताल पहुंचा चुके हैं।
रोहित कहते हैं कि 2009 से शुरू हुआ यह सिलसिला बदस्तूर जारी है। जब कोई भी सड़क पर घायल पड़ा दिखता है तो उसे हॉस्पिटल जरूर पहुंचाता हूं। हाल कि घटना 17 जून की है जब लखनऊ में उनकी आंखों के सामने ही बाइक सवार को किसी वाहन ने ठोकर मार दी। घायल अवस्था में उन्होंने उसे गोमतीनगर स्थित लोहिया हॉस्पिटल में भर्ती करवाया। उसी दिन देर शाम एक और व्यक्ति को हॉस्पिटल ले गए। वे बताते हैं कि अब तक 35 से ज्यादा लोगों को अस्पताल पहुंचा चुके हैं।
ये तस्वीरें उन लोगों की हैं जिन्हें रोहित ने हाल के ही दिनों में सड़क हादसे के बाद अस्पताल तक पहुंचाया है।



Source: news24
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