
जिन भी लोगों को आम तौर पर पर्याप्त 'मर्दाना' अहसास कराने वाले व्यक्ति के तौर पर पहचान नहीं मिलती वो डियोड्रेंट्स का इस्तेमाल कर इस फीलिंग को बढ़ा सकते है। ये हम नहीं कह रहे बल्कि एक नई स्टडी में इसका दावा किया गया है।
'हिंदुस्तान टाइम्स' की रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ स्टर्लिंग के रिसर्चर्स ने एक स्टडी की है। जिसमें पाया गया कि जिन भी मर्दों को 'लो मैस्कुलैनिटी' के लिए जाना जाता है। वे डियोड्रैंट के इस्तेमाल से अपनी मैस्कुलैनिटी बढ़ा सकते हैं।
स्टडी में इस बात की जांच की गई कि डियोड्रेंट लगाने से मैस्कुलैनिटी और फेमिनेनिटी के आकलन पर क्या असर पड़ता है। इस स्टडी में 130 स्त्री-पुरुषों ने हिस्सा लिया। जिन्होंने फेशियल मैस्कुलैनिटी और फेमिनेनिटी के लिए फोटोग्राफ्स के जरिए रेटिंग्स दी। इसके बाद 239 पुरुष और महिलाओं ने अपोजिट सेक्स के 40 लोगों को उनकी खुशबू के सैंपल्स पर रेटिंग दी।
रीसर्च में इस बात की पुष्टि हुई कि महिलाएं खुशबू के मामले में मर्दों की तुलना में ज्यादा संवेदनशील होती हैं। उनका ध्यान मर्दों की खुशबू की तरफ जल्दी भटकता है।
इस रीसर्च में पाया गया कि जो पुरुष चेहरे से मर्दानेपन में लो रेटिंग वाले थे। उन्होंने डियोड्रेंट के इस्तेमाल से अपनी ओडोर मैस्कुलेनिटी बढ़ा ली। लेकिन ऊंची मैस्कुलैनिटी वाले मर्दों की रेटिंग में डियो लगाने से कोई बढ़ोतरी नहीं हुई।
Source: news24
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